शिक्षण-सत्र 8 : प्रेरितों के काम सुसमाचार तेजी से फैलने लगा।

सुसमचार की नीव पड़ जाने के बाद, चेलो को सिर्फ मसीहा की आज्ञा का पालन करना था - ‘‘ जाओ और चेले बनाओ ’’ - कार्य रूप में । पर यह सब इतना सरल नहीं है। चेलो की कम संख्या, उनके अगुवे ; यीशू द का स्वर्ग पर चला जाना और उनका बहुत सारे संदेह और सताव से हो कर जाना था , इन प्रारंभिक अगुवो को और कलीसिया को जिस नयी क्रान्ति में उतरने के लिये बुलाया गया था उसके लिये एक चमत्कारिक स्तर के आनुभव की आवश्यक्ता थी। और हमेंशा की तरह परमेंश्वर उन्हें वही देते हैं जिस बात की और जिस समय पर उन्हें आवश्यक्ता थी जिसके परिणाम स्वरूप विस्फोटक रूप से रोम और उससे भी आगे कलीसिया की बढ़ौत्तरी हुयी। आइये देखें यह सब कैसे हुआ।

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