शिक्षण -सत्र 5 : भविष्यवक्ताओं का आत्मबल

भविष्यवक्ताओं के निर्देश दो श्रेणियो बीच में बॉटे जा सकते हैः परमेंश्वर की दृष्टि में उचित कार्य करने का पुरस्कार ; मौलिक बातो को पूरा करना  तथा आवश्यक सुधार जब ‘‘गलत’’ यह तस्वीर का हिस्सा बन जाते हैं। इसी उदाहरण में आप न्याय और वाचा का, प्रोत्साहन और चेतावनी, वर्तमान और भविष्य का मिश्रण को देखने पाते हैं। रोचक बात है कि अक्सर भविष्यवक्ता न केवल बोलने ही के लिये बुलाये जाते हैं पर अपनी भविष्यवाणी को स्वयं जीने के लिये बुलाये जाते हैं, वे इजराइल के लोगों को उनके वर्तमान समय की सच्चाइयो को वचन के मौलिक पहलुओ तथा भविष्य की आशा की वाचा में तराशाने के लिये निरन्तर बुलाते रहते हैं।  अगर आप कवियों की पुस्तकों के विषय में यह सोचते हैं कि वे उनके इतिहास में लोगों का दिल उजागर कर रहीं है, तो उसी के समान यह भी सहयक होगा यदि आप भविष्यवाणी की पुस्तकों कों उस इतिहास में परमेंश्वर के दिल को प्रगट करने वाला समझे।

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