शिक्षण-सत्र 3 : व्यवस्था को जीना

हाल ही में एक मसीही लेखक ने यह समीक्षा की, ‘‘ आगे आने वाले मसीहियो में- और कई पुराने मसीहियों में भी - आज परमेंश्वर कें साथ हमारे सम्बंध को विशेष करके उन विश्वासो के चारों तरफ बनाया गया है जो हम जीवन के तरीकें में थोड़ा बदलाव लाता है। ’’ यह कोई नई सच्चाई नहीं है जैसा कि इतिहास की पुस्तकों का हमारा अध्यन यह स्पष्ट करता है। इस खण्ड़ में हमारी यत्रा करीब 1000 सालो को अध्ययन करेगी जिसमें आप इस सच्चाई को कार्य कारते हुये देखेंगेः जब विश्वास और प्रतिदिन का जीवन अपस में आलग हो जाते हैं, तो उसका परिणाम होता है स्वार्थ , बीमारी और अस्त-व्यस्त कमजोरी। इन 12 पुस्तकों में जिस कुन्जी को ध्यान में रखने की आवश्यक्ता है वह है कि अगुवे व आम लोग उत्पत्ति से लेकर व्यवस्थविवरण में लिखी गयी इन आधारभूत बातों को किस प्रकार जीते हैं।

Sharing Links

Speaker