एक साथ चलना

जब आप एक मसीही बन गए, तो आप ने परमेश्वर के साथ चलना शुरू क्र दिया. यह प्रतिदिन का काम था जिसमे पाप की आपके जीवन से पकड़ कम होती गयी और आप और ज्यादा यीशु जैसे बनते गए. परन्तु कुछ दिन दुसरे दिनों से भिन्न होते है, विशेष तौर पर जब कठिन बातें आप के जीवन में होती है. यह बुरी बातें क्यों होती है? क्या मैं परमेश्वर से कुछ रख सकता हूँ यदि इससे मेरी सहायता हो सके कि मैं पीड़ा से बच सकूं? जब मैं पाप को अपने जीवन के किसी भी क्षेत्र में आने की अनुमति देता हूँ, तो क्या इसके कुछ परिणाम होते है? इसका क्या अर्थ है कि यीशु “मुक्तिदाता” और “प्रभु” है?

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