परमेश्वर को सुनना

एक रिश्ते में एक महत्वपूर्ण बात है बातचीत, जिसमे आप सुनते है और बोलते है. परमेश्वर ने हम से दो बुनियादी तरीकों से बात की है, श्रृष्टि के द्वारा और अपने वचन बाइबिल के द्वारा. “प्रेरणा”, “अधिकार”, और “कैंनिसिती” शब्दों का क्या अर्थ है? क्या हम बाइबिल पर भरोसा क्र सकते है? मैं कैसे परमेश्वर को सुन सकता हूँ जब मैं उसके वचन को पढ़ता हूँ? क्या मुझे पढ़ने के इलावा कुछ और भी करने की आवश्यकता है?

03 Confession (Hindi)

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