बाईबल सर्वेक्षण, एक बडा पर्दा दृष्टिकोण

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हम में से कुछ लोगों का बाइबल का ज्ञान रेफ़्रीजरेटर के दरवाज़े पर लगे नोट्स की तरह हैं, और इन सभी में एक महत्वपूर्ण संदेश है, परंतु इनका आपस में कोई भी मेल नहीं है। कुछ के लिए यह शब्दकोश की तरह है, इसमें जानकारी के महत्वपूर्ण टुकड़े हैं परंतु इनमें कहानी का कोई धागा नहीं है। यह शृंखला आपकी सहायता करेगी कि यह सभी टुकड़े समझ में आ सकें। डॉक्टर डाउनस आपको एक फ़ाइल कैबिनेट देंगे  जिसमें आप अपने  व्यक्तिगत फ़ाइल फ़ोल्डर को डाल सकते हैं। मैं यह नहीं जानता कि आयु क्या है, शायद ऐसी कोई आयु न हो, परंतु हमारे आत्मिक विकास के वर्षों में किसी न किसी जगह पर सिखाने के कोर्स में यह आवश्यक होगी। यदि आप बाइबल को एक मेज़ के रुमाल के ऊपर संक्षेप में जानना चाहते हैं, तो यह आपको एक तरीक़ा देगा कि आप यह कर सकें।

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Lectures

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यह पहला शिक्षण-सत्र है, हम परीक्षण करेंगे कि चेलों के लिये सम्पूर्ण बाईबल   के लिये ‘‘ बडा पर्दा ’’ दृष्टिकोण क्यों आवश्यक है और जो अगुवाई कें लिये बुलाये गये हैं उनकें के लिये यह क्यों महत्वपूर्ण है। इस यात्रा के माघ्यम से, आप अांग्रेज़ी बाईबल  की संरचना से अवगत होगे और किस प्रकार संरचना को सीखनें के माध्यम से, आप अपने सम्पूर्ण जीवन में बाईबल  की विषय वस्तु, उसके प्रयोजन और उसके अमल को बनाये रखने के लिये आवश्यक प्रवीणता को विकसित करने पाते हैं। और आप यह भी सीखना प्रारम्भ कर देंगें कि किस प्रकार बड़ी तस्वीर को, बाईबल  मैनेजमेन्ट कौशल को, अपनी शिक्षा और परामर्श प्रभाव को विकसित करने के लिये प्रयोग में लाये। यह तीव्र 30 मिनट होंगें। अपने बाईबल  के दौडने जूते पहन ले और दौड़ने के लिये तैयार हो जायें।

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अगले 30 मिनटों में हम बहुत तेजी से भागते हुये पुराने नियम की बुनियादी पुस्तकों की छानबीन करेंगे। आम तौर पर जिन्हें Pentateuch;यथाशब्द,‘‘ पॉच पुस्तकें ’’ इन  लेखनो ने पुराने नियम की हमारी यात्रा को दिशा दी हैं इतिहास के स्वभाव को समझने में हमारी सहायता करने करके जो कि हम आगे गौर से देखेगे और उन निर्देशां के स्वभाव समझने में जो उस इतिहस को जी रहे लोगों को दिये गयें थे।  

इन कम्पास पुस्तकों में हम उत्पत्ति के संबंध में और फिर उसकी प्रजा इजराइल के साथ, परमेंश्वर की योजना को देखेंगे। हम समझने लगते हैं कि किस प्रकार यह लेखन अपने लोगों को पहले पाप के परिणामों तथा उन छुडाये हुये लोगों में चरित्र को प्रतिरोपित की परमेंश्वर कें हृदय की अभिलाषा को दर्शाता हैं, जो समस्त मानवजाति को छुटकारा प्रदान करने के उनके विशाल उद्धेश्य के साथ है।

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हाल ही में एक मसीही लेखक ने यह समीक्षा की, ‘‘ आगे आने वाले मसीहियो में- और कई पुराने मसीहियों में भी - आज परमेंश्वर कें साथ हमारे सम्बंध को विशेष करके उन विश्वासो के चारों तरफ बनाया गया है जो हम जीवन के तरीकें में थोड़ा बदलाव लाता है। ’’ यह कोई नई सच्चाई नहीं है जैसा कि इतिहास की पुस्तकों का हमारा अध्यन यह स्पष्ट करता है। इस खण्ड़ में हमारी यत्रा करीब 1000 सालो को अध्ययन करेगी जिसमें आप इस सच्चाई को कार्य कारते हुये देखेंगेः जब विश्वास और प्रतिदिन का जीवन अपस में आलग हो जाते हैं, तो उसका परिणाम होता है स्वार्थ , बीमारी और अस्त-व्यस्त कमजोरी। इन 12 पुस्तकों में जिस कुन्जी को ध्यान में रखने की आवश्यक्ता है वह है कि अगुवे व आम लोग उत्पत्ति से लेकर व्यवस्थविवरण में लिखी गयी इन आधारभूत बातों को किस प्रकार जीते हैं।

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निर्देश देने वाले भाग में ; अय्यूब -मलाकी : 22 पुस्तके हैं जिन्हें हम दो खण्डों में विभाजित करेंगेंः काव्यात्मक ;5  पुस्तकें तथा भविष्यवाणी की पुस्तकें ;17। आधारभूत भाग में हमने परमेंश्वर के कम्पास की कुशलता को उसके लोगों के लिये में उपयोग में लाया तथा इतिहास के खण्ड़ हमनें देखा के कि उस कैम्पस के संबंध में लोगों ने क्या किया। इस भाग में हम कवियों के दृष्टि से लोगों के अनुभवों को देखेंगें, उस अनुभव में उनके ह्दय के विषयों की जॉच  करेगें और उसमें परमेंश्वर के प्रोत्साहन तथा उनके निर्देशो के सुधार दोनो को अनुभव करेगें। कवियों में आपका स्वागत है! आत्मा के भोजन के लिये तैयार हो जाओ।

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भविष्यवक्ताओं के निर्देश दो श्रेणियो बीच में बॉटे जा सकते हैः परमेंश्वर की दृष्टि में उचित कार्य करने का पुरस्कार ; मौलिक बातो को पूरा करना  तथा आवश्यक सुधार जब ‘‘गलत’’ यह तस्वीर का हिस्सा बन जाते हैं। इसी उदाहरण में आप न्याय और वाचा का, प्रोत्साहन और चेतावनी, वर्तमान और भविष्य का मिश्रण को देखने पाते हैं। रोचक बात है कि अक्सर भविष्यवक्ता न केवल बोलने ही के लिये बुलाये जाते हैं पर अपनी भविष्यवाणी को स्वयं जीने के लिये बुलाये जाते हैं, वे इजराइल के लोगों को उनके वर्तमान समय की सच्चाइयो को वचन के मौलिक पहलुओ तथा भविष्य की आशा की वाचा में तराशाने के लिये निरन्तर बुलाते रहते हैं।  अगर आप कवियों की पुस्तकों के विषय में यह सोचते हैं कि वे उनके इतिहास में लोगों का दिल उजागर कर रहीं है, तो उसी के समान यह भी सहयक होगा यदि आप भविष्यवाणी की पुस्तकों कों उस इतिहास में परमेंश्वर के दिल को प्रगट करने वाला समझे।

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इससे पहले कि हम नये नियम की धटनाओ को पाते है पुराने नियम में मिलने वाला इतिहास समाप्त हो जाता है । इन दोनो नियमों के बीच में एक आवधि है जिसे 400 वर्ष की चुप्पी कहते हैं क्योंकि यहूदी अनुमान के अनुसार इजराइल में उस समय में किसी भविष्यवक्ता ने बाते नही की। हॉ, शायद इसे चुप्पी कहा जाये, पर जैसा कि आप जल्दी ही देखेंगें, कि यह कुछ भी हो सकता है पर चप्पी नहीं। बल्कि यह तो सक्रिय विजय का, राजनैतिक और धार्मिक विकास, और इजराइल की आधारभूत मूल्यों व रीतियो से समझौता करे या समझौता न करे के चारो ओर संधर्ष का समय था। यह वह काल था जब परमेंश्वर सभ्यता/इतिहास की मेज़ को आपने बेटे के आगमन के लिये तैयार कर रहे थे।

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उन पुस्तकों के माध्यम से जिन्हें हम सुसमाचारो के नाम से जानतें है हम परमेंश्वर का बेटे, यीशू मसीह के जीवन में प्रवेश करते हैं। सुसमाचार की हर एक पुस्तक - मत्ती, मरकुस, लूका, यूहन्ना- हमें इस जीवन के भिन्न पहलुओ को दर्शाती है जो हमारे जीवनो को परिवर्तित कर देगा ण् ण् ण्  पर बिना विरोध के नहीं क्योंकि वह जो मनुष्य का पुत्र भी कहलाता है जीवित हैं, शिक्षा देता है, छूता है और बहुतों के छुडौती के लिये अपने प्राणो को देता हैण् ण् ण्  छुडौती जो परमेंश्वर पिता को ग्रहण है और सर्वोच्च चमत्कार के माध्यम से जिसकी पुष्टि हुयी है, मसीह का पुनरूत्थन।

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सुसमचार की नीव पड़ जाने के बाद, चेलो को सिर्फ मसीहा की आज्ञा का पालन करना था - ‘‘ जाओ और चेले बनाओ ’’ - कार्य रूप में । पर यह सब इतना सरल नहीं है। चेलो की कम संख्या, उनके अगुवे ; यीशू द का स्वर्ग पर चला जाना और उनका बहुत सारे संदेह और सताव से हो कर जाना था , इन प्रारंभिक अगुवो को और कलीसिया को जिस नयी क्रान्ति में उतरने के लिये बुलाया गया था उसके लिये एक चमत्कारिक स्तर के आनुभव की आवश्यक्ता थी। और हमेंशा की तरह परमेंश्वर उन्हें वही देते हैं जिस बात की और जिस समय पर उन्हें आवश्यक्ता थी जिसके परिणाम स्वरूप विस्फोटक रूप से रोम और उससे भी आगे कलीसिया की बढ़ौत्तरी हुयी। आइये देखें यह सब कैसे हुआ।

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शिक्षा कई रूप में आती है। हम एक प्रकार के  शिक्षा देने के तरीके का प्रयोग कर रहे है  चलचित्र  ;विडियो ,  कक्षा। इस बात को कहने की आवश्यक्ता नहीं है कि प्रारम्भिक कलीसिया के अगुवो के पास इस प्रकार की विधि उपलब्ध नहीं थी। यदि वे किसी ऐसे व्यक्ति को प्रभु में सहायता करना चहते थे तो जो उनसे दूर है तो उन्हें व्यक्तिगत मिलने के अतिरिक्त जिस सबसे उत्तम व व्यक्तिगत माध्यम का प्रयोग करना पड़ता था और वह था - एक व्यक्तिगत पत्र। जैसे हम 22 पत्रो के देखते है जो कि नये नियम की शिक्षाआें का भाग है तो हमें यह याद रखने की आवश्यक्ता है कि यह केवल वे व्यक्तिगत पत्र है जिन्हें प्रारम्भिक कलीसिया में उन लोगों को जो मसीह के अनुयायियो में उसके जीवन को लाने के लिये कार्य करत थे उन लोगों के प्रति प्रेम व परवाह साथ भेजे गये वे पत्र हैं। और ये पत्र वही व्यक्तिगत प्रेम और चिन्ता आपके और मेरे लिये भी लेकर आते है।

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हम अपने अंतिम मूल्यॉकन पर आ गये है जो कि बाईबल  के लेखक यहूदा के साथ इस बात का सार निकालेते हुये वचन के साथ-साथ हमारी यात्रा के महत्व व उसके परिणाम के महत्व को देखने में हमारी सहायता करेगा। याद रखें जब आप इन अध्ययनो में से होकर जायेगें, तो यह मूल्यॉकन इस बड़ी तस्वीर को स्वयं बनाने में एक महत्वपूर्ण भाग होगा। आने वाले सप्ताहो में कुछ निरन्तर मूल्यॉकन, और जीवन पर्यन्त कें लिय आप इस साधन को आपनी आत्मिक उत्रति के लिय व सेवकाई के लिये बनाते चले जायेगें। इसके विपरीत, बिना किसी मूल्यॉकन के यह साधन धीरे से हॉथों से फिसलता चला जायेगा और साथ,  उसके गुण भी जो परमेंश्वर ने आपके जीवन के लिये व अपकी सेवकाई के लिये रखें हैं। संदेश ? थोडा और व्यक्तिगत निवेश ; मूल्यॉकन  और आप के निवेश पर आपकी कमाई आपकी आपेक्षा से कहीं ज्यदा होगी। मसीह में आपकी सिद्धता और उसके लिये आपकी सेवकाई दोनों इससे लाभ उठायेंगे। 

Speakers

Duration

6 hours

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