46. विनम्रता

फिलिप्पियों की कलीसिया से पौलुस चाहते थे कि वे विनम्रता एवं दीनता को समझें। उन्हें एक मुख्य बात पर एक मन होना था जो विनम्रता थी, जो मसीह में आप क्या हैं की समझ से निकालती है उदाहरण के लिये हम यीशु की तरफ देखते हैं जो परमेश्वर के तुल्य होने के बावजूद अपने आप को इन्सान के रूप में दीन किया और इसी कारण उन्हें महान किया गया। उद्धार पाने से क्या उत्पन्न होता है हमें उस पर गहनता से विचार करना चाहिये।

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