41. पिन्तेकुस्त

यहूदी पर्व पिन्तेकुस्त के दौरान फसह के 50 दिनों के बाद यीशु की प्रतिज्ञा पूरी हुई और पवित्र आत्मा ने आकर यीशु के सभी अनुयायियों को सामथ्र्य दी, उन्हें अलौकिक सामथ्र्य दी और दूसरी बातों के साथ उन्हें ऐसी मानवीय भाषा बोलने की सामथ्र्य दी जो उन्होंने सीखी नहीं थी। पतरस इस घटना को पुराने नियम की भविष्यवाणियाँ पूरी होना बताते हैं और फिर उस मौलिक सन्देश का प्रचार करते हैं जो प्रेरतों  के काम की पूरी पुस्तक में पाया जाता है। यीशु रहे, मर गए, और मुर्दों में से जी उठे। इसीलिये सभी लोगों को पश्चाताप करने की बुलाहट है, जिन्हें यीशु के बारे में गलत फहमी है।

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